जेंडर भेदभाव से किशोरियां डिप्रेशन का शिकार : रिसर्च



यूनिफॉर्म का मतलब है बराबर या यूनिटी का प्रतीक | है ना ? लेकिन स्कूलों में ड्रेस कोड ही यूनिफॉर्म नही | जरा स्कूलों की यूनिफॉर्म पर नजर डालिए जो लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग होती हैं | लड़कों के लिए शॉर्ट्स या ट्राउजर्स तो लड़कियों के लिए अलग स्कर्ट, ट्यूनिक या सलवार कमीज | कभी सोचा हैं आपने कि जब एजुकेशन एक, संस्थान एक, मकसद एक, तो यूनिफॉर्म अलग क्यों ? स्कुलो में जेंडर न्यूट्रल यूनिफॉर्म होनी चाहिये | जिससे लड़के और लडकियां शुरू से जेंडर न्यूट्रल और जेंडर सेंसिटिव माहौल के साथ बड़े हों |  




यूनिफॉर्मिटी तोड़ने वाली स्कुल यूनिफॉर्म....... शिक्षा, स्कुल, लक्ष्य एक तो यूनिफॉर्म अलग क्यों?

हम एक प्रोफेशनल माहौल में पढ़ाई कर रहे है |

जेंडर न्यूट्रल यूनिफॉर्म रही तो बच्चो में लड़का-लड़की का भेद जरुर ख़त्म होगा |
द गार्डियनमें छपी एक रिपोर्ट चौकाने वाली हैं | इस रिपोर्ट में यूके (UK) स्थित संस्थान गर्लगाइड के एक सर्वे के अनुसार सोसाइटी में जेंडर स्टीरियोटाइपिंग यानी जेंडर के आधार पर होने वाले भेदभाव के कारण दुनियाभर में लड़कियां 14 साल की उम्र तक आते-आते डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं न्यूरोबयोलोजिस्ट के अनुसार जन्म की समय लड़के और लड़कियों के दिमाग की क्षमता एक जैसी होती हैं | लेकिन जब वे किशोरावस्था में प्रवेश करते हैं तो दोनों की सोचने की क्षमता में फर्क आ जाता हैं | ऐसा उनके साथ हो रहे भेदभाव के बर्ताव और पक्षपात भरे माहौल के कारण होता हैं, जिससे जेंडर के आधार पर तय किए गए उनके कपड़ो के रंग, खिलौने और उनकी आँखों में भरे गए सपने शामिल हैं |
स्टूडेंट्स के कपड़ों का असर उनके माइंडसेट पर देखने को मिलता है | यूनिफॉर्म से छात्रों में अमीर, 
गरीब व दूसरी तरह का भेदभाव नहीं पनपता है |

भेदभाव से बचने का तरीका :-

 दी इंडिपेंडेट की एक खबर के मुताबिक इंग्लैंड के करीब 40 सेकेंडरी स्‍कूलों में छात्राओं के स्कर्ट पहनने पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि लड़कियों को स्‍कर्ट की जगह ट्राउजर्स पहनने के लिए कहा जायेगा। इसके पीछे के कारण का खुलासा करते हुए बताया जा रहा हैकि अब पूरे ब्रिटेन के ज्यादातर स्कूल एवं शैक्षणिक संस्थान लैंगिक भेदभाव से भिन्न यूनिफॉर्म नीति अपनाने के पक्ष में हैं । पता चला है कि पिछले कुछ दिनों इंग्‍लैंड में हुए एक यूनिफॉर्म नीति के विश्लेषण में पता लगा हैकि इन 40 सेकेंडरी स्कूलों ने लड़कियों के स्कर्ट पहनने पर रोक लगा दी गई हैजबकि कुछ और स्कूल भी इस बारे में सोच रहे हैं। इस नियम को लागू करने पीछे स्कूल प्रशासन का तर्क है कि वे ट्रांसजेंडर लोगों की जरूरतों को भी ध्यान में रखना चाहते हैं इसलिए सभी को ट्राउजर पहनने के लिए कहा जा रहा है।